सोमवार, 6 जुलाई 2020

आरज़ू

 आरज़ू
Pic-fb

न जाने क्यों तुझसे इतना लगाव है,
लगता है अब तू ही मेरी मंजिल है
और तू ही बस आखिरी पड़ाव है,

सीखना था जो सीख लिया अब मैने,
बस अब दिल को न और कोई चाहत है,
मिली तुम एक तरफ़ तो अब मुझे,
बाकी रही न कोई और ख्वाईश है।

पहुँच ही गया हूँ मैं भटकता हुआ आखिर,
अब यही बस मेरा आखिरी मकां है।
बस अब और न भागना अंधेरो से,
अब तो बस तू ही आखिरी पड़ाव है।

लगा था जिस खोज में ,अब तलक,
पूरी जो तेरे मिलन से हुई है।
हुआ है जो ये करिश्मा तो लगता है
 बरसो की तपस्या जो सफल हुई हैं।

न जाने क्यों दिल को तुझसे इतना लगाव है,
देखे तो पहले भी थे हमने चश्मों-चिराग पर,
तेरा आना कुछ अजीब और निराला था,
लगता है जैसे तुम सुबह की चाय, 
और मैं चाय का गर्म प्याला था।
आनन्द
(इंजीनियर की कलम से)






रविवार, 7 जून 2020

कोरोना के कर्मवीर

देश मे है फैली एक महामारी, जिसका नाम है कोरोना।
इस संकट से पार है अगर पाना, तो हाथ लगातार धोना।

जरा ध्यान करो उन लोगों का भी,जो घर पर भी न रुक पाते है।
और पीकर चाय घर के  बाहर से वापस अस्पताल आ जाते है।।
पता है उनको कि खतरा है उनको भी संक्रमण का,
फिर भी वो लगे आपकी सेवा में,न एक पल और गवांते है।।

वक्त की कैसी विडंबना है ये,
सफाई वाले भी पूरा साथ निभाते है।
और कैसी समस्या है ये अब,
अपनो से भी न मिल पाते है।

शर्म करो अब कुछ तो हे मानव,
क्यों धरती के भगवान को सताते हो।
नही आने वाला अब मंदिर वाला,
क्यों मानव सेवा में बाधा पहुँचाते हो?

पुलिस भला क्यों तुमको पीटे,
बन्द करो ये औछी हरकत और डॉक्टर पे थूक के छीटें।
आखिर में यही भगवान काम अब आएगा,
आन पड़ी इस अटल विपदा से यही बचाएगा।

परमार्थ इसी में हम सबका अब, साथ इनका देना है।
आया संकट देश पर, इसको दूर भगाना है।
करो सेवा लोगो की तुम, अगर ये भी न कर पाते हो,
तो बैठे रहो घर मे कुछ दिन, क्यों इन योद्धाओं को सताते हो?

कोरोना के कर्मवीरों को मेरा करबद्ध नमस्कार है,
अंत मेरी सबसे यही गुहार है,
बन्द करो सब प्रपंच और दकियानूसी,
इसमें ही हम सबका उपकार है।
 -आनन्द






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