माया तेरा नाम को
Foto -vijay stambh chittorgarh
रूपीड़ा थारा रूप न, बदल दियो परिवेश।
एक तो मारियो गरीब न, बढ़ा दियो द्वेष।।
बाप न बाप ना समझे, बेटा न समझे बेटो।
हाट की भाषा रही नहीं , पण समझे है टको।।
छोरा रेगा कुंवारा,तो करवा दियो आटो साटो।
आड़ी टेढ़ी चाल सु, हो गयो फरफेटो।।
बढ़का को जमानों चोखो हो, कुनबा न छोरी देता हा।
इब नीरा मिनख आया,पीसा न छोरी देवे है।।
रामूडो ह्यूगो राम सिंह, आ माया है अब तेरी।
आनन्द नाम संतोष को, अब के जात घटे मेरी।।
पानी का फल्डा सु जलता चूल्हा गया,आगी गैस निराली।
ज्यूं ज्यूं खाया टुकड़ा इनका, पेट की गैस बना ली।।
ओजु दम है तो आवो चूल्हा प,फेर करामात दिखे ली।
सारी बीमारी जड़ सु, या एलम ही मेट ली।।
पीसा थारा नाम सूं , पूज्या सारा नामी गिरामी।
जे न व्हे तो माटी कूट ज्या,बच ज्या सिर्फ हैरानी।

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