सोमवार, 20 जुलाई 2020

ग्यारवीं का इश्क़




Pic- fb

ग्यारवीं के इश्क़ की क्या कहूँ,
 लाजवाब था वो भी जमाना,
इसके बादशाह थे हम लेकिन,
रानी का दिल था शायद अनजाना।

सुबह आते थे क्लासरूम में,
हसरत थी पास बैठने की,
पर वो मोटा भी क्या अजीब था,
दो पन्ने पढ़कर, पास उसके बैठ जाता था।

अजी, बैठ भी क्या जाता था,
हमे तो हिलने तक नही देता था,
रुतबा था क्योंकि कक्षा प्रधान जो था,
लेकिन हमसे भी वो बड़ा परेशान था,

पढ़ते हम भी थे केमिस्ट्री उसकी ही तरह,
बस हमारी में थोड़ा मीठा सोडा जो था,
वो नमक की तरह बना देता था क्लासरूम को,
प्यार की पिंगो को लवणों से बचा जो रखा था।

अजीबोगरीब हालत थी उस वक्त,
कोई भी नही बताता था इसका हल।
और बाकी तो सब ठीक था,लेकिन
मास्टर जी बस कहते थे हमें इंग्रेजी में डल।


ख्वाइश तो थी परोस दुं उसे आज,
लंचबॉक्स के साथ,सारी पिछली बातें।
पर  डर था कही कह न दे ये मास्टर जी को,
जो हमने फेंके थे उसकी ओर सत्ते पे सत्ते।

जवां उम्र थी, सपने भी बड़े हसीन थे,
क्या पता हकीकत भी कुछ और सकती थी,
डाले थे फूल तो हमने भी कॉपी में,
पर बैरन खोलेगी नही, हमे ये बात कहाँ जचती थी।

ये ग्यारवीं का इश्क़ था जनाब,
लिखे थे जी तोड़, जो शब्द उस पहले प्रेम-पत्र में,
बस वही दबे के दबे रह गए ,
और बारवीं तक आते- आते हम कही और,
और वो किसी और के हो गए।

आनन्द
इंजीनियर की कलम से



11 टिप्‍पणियां:

दिव्या अग्रवाल ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 20 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Rakesh ने कहा…

बहुत खूब

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह बहुत खूब।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 21 जुलाई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


शुभा ने कहा…

वाह!बहुत खूब👌

अर्जुन भाटी ने कहा…

इश्क़ तो हमारा भी था ग्यारवीं में बस फर्क इतना था कि हम पड़ने आते थे और वो पढ़ने ।

Unknown ने कहा…

बहुत खूब

Unknown ने कहा…

बहुत खूब

Ananta Sinha ने कहा…

आदरणीय सर,
बहुत ही आनन्दकर कविता। पढ़ के बहुत मज़ा आया।
कॉलेज क्रश का एक अपना ही आनंद होता है।
मैं यह कविता अपनी अभी सहेलियों को सुनाऊँगी।
एक अनुरोध और,कृपया मेरे भी ब्लॉग और आइये। मैं वहाँ अपनी स्वरचित कविताएं डालती हूँ। आपके आशीष व प्रोत्साहन के लिये आभारी रहूँगी।
लिंक कोय नहीं कर पा रही। मेरे नाम पर क्लिक करियेगा, वो आपको मेरे प्रोफ़ाइल तक ले जाएगा। वहाँ मेरे ब्लॉग काव्यतरंगिनी के नाम पर क्लिक करियेगा, आप मेरे ब्लॉग तक पहुंच जाएंगी।
धन्यवाद

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!
बहुत खूब...

आनन्द शेखावत ने कहा…

सभी का बहुत बहुत आभार।
और मुझे व्यक्तिगत प्रतिक्रिय देने वाला बटन सेट करना नही आ रहा है अतः इसे ही धन्यवाद स्वीकार करें।

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