मंगलवार, 28 जुलाई 2026

माया तेरा नाम को

Foto -vijay stambh chittorgarh 


रूपीड़ा थारा रूप न, बदल दियो परिवेश।
एक तो मारियो गरीब न, बढ़ा दियो द्वेष।।

बाप न बाप ना समझे, बेटा न समझे बेटो।
हाट की भाषा रही नहीं , पण समझे है टको।।

छोरा रेगा कुंवारा,तो करवा दियो आटो साटो।
आड़ी टेढ़ी चाल सु, हो गयो फरफेटो।।

बढ़का को जमानों चोखो हो, कुनबा न छोरी देता हा।
इब नीरा मिनख आया,पीसा न छोरी देवे है।।

रामूडो ह्यूगो राम सिंह, आ माया है अब तेरी।
आनन्द नाम संतोष को, अब के जात घटे मेरी।।

पानी का फल्डा सु जलता चूल्हा गया,आगी गैस निराली।
ज्यूं ज्यूं खाया टुकड़ा इनका, पेट की गैस बना ली।।

ओजु दम है तो आवो चूल्हा प,फेर करामात दिखे ली।
सारी बीमारी जड़ सु, या एलम ही मेट ली।।

पीसा थारा नाम सूं , पूज्या सारा नामी गिरामी।
जे न व्हे तो माटी कूट ज्या,बच ज्या सिर्फ हैरानी।









बुधवार, 17 जून 2026

मायड़ भाषा

परदेसी बाबू



दोन्यू बढ़गर मोकळा, बंध्या परदेशा  म ठेठ।
भाण- भाया को जमावड़ों, म्हाने बणाया सेठ।।

संग म काको अर मात है, काली कोशा हाट।
जे मैं आगो गांव न, धंधों हूजा बारा बाट।।

आगे सावण मोकळो, मिलस्यां सारा साथ।
अबके तो थे दयों माफी, जोड़या दोनू हाथ।।

दादी बूढ़ी हो री घणी, सेवा मांगे दिन -रात।
ओजू आस्युँ मिलवा न, जे ऊपरला को रेसी साथ।।

 मैं तो मेरा चाव स्यु, आयो नहीं परदेश।
या पेट की लाय अनोखड़ी, छुड़ा दियो स्वदेश।।

-परदेसी आनन्द

लोकप्रिय पोस्ट

ग्यारवीं का इश्क़

Pic- fb ग्यारवीं के इश्क़ की क्या कहूँ,  लाजवाब था वो भी जमाना, इसके बादशाह थे हम लेकिन, रानी का दिल था शायद अनजाना। सुबह आते थे क्लासरूम में...

पिछले पोस्ट