शनिवार, 18 अप्रैल 2026

इंसान बना हैवान

इंसान बना हैवान



नंगा आया और नंगा ही चला जायेगा,
लेकिन फिर भी चालाकी तो दिखाएगा।
इंसान नहीं पुतला है फिर भी,
अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा।।

जब हुआ बड़ा तो विद्यालय भी गया,
लेकिन विद्या के अर्थ को कभी समझ न पाया।
गुरुओं की वाणी भी मिथ्या लगी उसको,
जब उसने अपार धन कमाया।।

कहने को तो पंच बना फिरता है,दूसरों के मसलों में,
खुद पर जब आई तो, सारी चतुराई फीकी पड़ी।
मांस,मदिरा के सेवन से, जब तमाे गुण बढ़ गया,
उसी के मद में आकर ,अब स्त्री को कूट दिया।।

अब तो  बॉस भी खुद बन गया,
जैसे धरती का यही कृता हो।
चाहता है अब कैसे भी हो,
लेकिन हर तरफ बस इसकी ही जय हो।।

माना कि था तो वो भी एक सादा इंसान,
लेकिन पैसे और मदिरा ने उसको हैवान बनाया।
मद के इस सागर में डूबा तो ,
और खुद की प्रतिछाया को भी भूल गया।।

इस कलयुग में जो न हो वो थोड़ा है,
परिस्थिति ने हम सबको ही तोड़ा है।
लेकिन फिर अडिग रहे अपने उसूलों पर,
आखिर इंसान बने रहने में क्या कोई रोड़ा है?
          
                                                     -लम्हें 







बुधवार, 15 अप्रैल 2026

जीवन के जाल

जीवन के जाल





कुछ समझ न आता इसे क्या कहूं,
जीवन का जाल कहूं या कहूं जंजाल।।
करता हूं मैं कुछ, और कुछ ही हो जाता है,
बस फिर क्या,उसको समेटते दिन ढल जाता है।।

यूं तो सबकी जिंदगी में है आफत 
पर मुझ सा कहीं तूफान नहीं।
मानो बैठा हूँ गर डाली पर तो,
डाली में भी जान नहीं।।

रोज रात को सोता हुं ,कल के नए वादे लिए।
पर हुआ सवेरा तो,सब चौपट हो जाता है।।

फिर वही भाग दौड़ में शामिल,
सपने कहीं छूट जाते है।
इन्हीं सपनों को पूरा करते करते,
फिर अपने पीछे छूट जाते है।।

तभी पीछे से एक आहट सुनाई देती है,
कहती हैं दिया था तुझे एक कोरा पन्ना।
अपने साझ बना ले ढंग से 
लेकिन इस जीवन के जाल में फंसते फंसते 
न साझ बचा न वो कोरा पन्ना।।

जवानी के ख़ाब देकर , बचपन ने लूट लिया,
दौलत का खाब देकर, जवानी ने लूट लिया।
कुछ बचा है तो सिर्फ मैं,इस सूनेपन में,
इसको अब तेरी , यादों ने लूट लिया।।

                     
                              -लम्हें




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