इंसान बना हैवान
नंगा आया और नंगा ही चला जायेगा,
लेकिन फिर भी चालाकी तो दिखाएगा।
इंसान नहीं पुतला है फिर भी,
अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा।।
जब हुआ बड़ा तो विद्यालय भी गया,
लेकिन विद्या के अर्थ को कभी समझ न पाया।
गुरुओं की वाणी भी मिथ्या लगी उसको,
जब उसने अपार धन कमाया।।
कहने को तो पंच बना फिरता है,दूसरों के मसलों में,
खुद पर जब आई तो, सारी चतुराई फीकी पड़ी।
मांस,मदिरा के सेवन से, जब तमाे गुण बढ़ गया,
उसी के मद में आकर ,अब स्त्री को कूट दिया।।
अब तो बॉस भी खुद बन गया,
जैसे धरती का यही कृता हो।
चाहता है अब कैसे भी हो,
लेकिन हर तरफ बस इसकी ही जय हो।।
माना कि था तो वो भी एक सादा इंसान,
लेकिन पैसे और मदिरा ने उसको हैवान बनाया।
मद के इस सागर में डूबा तो ,
और खुद की प्रतिछाया को भी भूल गया।।
इस कलयुग में जो न हो वो थोड़ा है,
परिस्थिति ने हम सबको ही तोड़ा है।
लेकिन फिर अडिग रहे अपने उसूलों पर,
आखिर इंसान बने रहने में क्या कोई रोड़ा है?
-लम्हें

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